Monday , May 17 2021

Akbar Allahbadi Category

Farmaana – Akbar Allahbadi

मैं जो कहता हूँ कि मरता हूँ तो फ़रमाते हैं कारे-दुनिया न रुकेगा तेरे मर जाने से

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Shakl – Akbar Allahbadi

शक्ल जब बस गई आँखों में तो छुपना कैसा दिल में घर करके मेरी जान ये परदा कैसा

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Jannat – Akbar Allahbadi

बाद मरने के मिली जन्नत ख़ुदा का शुक्र है  मुझको दफ़नाया रफ़ीक़ों ने गली में यार की 

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Wasl – Akbar Allahbadi

कट गई झगड़े में सारी रात वस्ल-ए-यार की शाम को बोसा लिया था, सुबह तक तक़रार की 

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Palake – Akbar Allahbadi

आँखों में तेरी ज़ालिम छुरियाँ छुपी हुई हैं  देखा जिधर को तूने पलकें उठाके मारा

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Dil – Akbar Allahbadi

हज़ारों दिल मसल कर पाँवों से झुँझला के फ़रमाया,  लो पहचानो तुम्हारा इन दिलों में कौन सा दिल है ।

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