Monday , May 17 2021

Bashir Badr Category

Khushbu – Bashir Badr

बस गई है मेरे अहसास में ये कैसी महक कोई ख़ुशबू मैं लगाऊँ तेरी ख़ुशबू आए

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Hoton Pe Mohabbat – Bashir Badr

होठों पे मुहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समंदर के ख़ज़ाने नहीं आते। पलके भी चमक उठती हैं सोते में हमारी आंखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते। दिल उजडी हुई इक सराय की तरह है अब लोग यहां रात बिताने नहीं आते। उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ …

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Raat Aankho Me Dhali – Bashir Badr

रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनूँ आए हम हवाओं की तरह जाके उसे छू आए बस गई है मेरे अहसास में ये कैसी महक कोई ख़ुशबू में लगाऊँ तेरी ख़ुशबू आए उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया मुद्दतों बाद मेरी आँखों में आँसू आए मेरा आईना …

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Gharo Pe Naam The – Bashir Badr

घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे बहुत तलाश किया, कोई आदमी न मिला

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Hai Ajeeb Shahr Ki Zindagi – Bashir Badr

है अजीब शहर कि ज़िंदगी, न सफ़र रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर, कहीं बदमिज़ाज सी शाम है कहाँ अब दुआओं कि बरकतें, वो नसीहतें, वो हिदायतें ये ज़रूरतों का ख़ुलूस है, या मतलबों का सलाम है यूँ ही रोज़ मिलने कि आरज़ू बड़ी रख रखाव कि गुफ्तगू …

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Kurbato Ki Duri – Bashir Badr

बहुत अजीब है ये कुरबतों की दूरी भी वो मेरे साथ रहा, और मुझे कभी न मिला

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