Monday , May 17 2021

Gulzar Category

Zihal E Miski Mukon Ba Ranjish

जिहाल-ए-मिस्कीं मुकों बा-रंजिश, बहार-ए-हिजरा बेचारा दिल है, सुनाई देती हैं जिसकी धड़कन, तुम्हारा दिल या हमारा दिल है। वो आके पेहलू में ऐसे बैठे, के शाम रंगीन हो गयी हैं, ज़रा ज़रा सी खिली तबियत, ज़रा सी ग़मगीन हो गयी हैं। कभी कभी शाम ऐसे ढलती है जैसे घूंघट उतर …

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Jagjeet _ Ek Bochhar Tha Wo

एक बौछार था वो शख्स, बिना बरसे किसी अब्र की सहमी सी नमी से जो भिगो देता था… एक बोछार ही था वो, जो कभी धूप की अफशां भर के दूर तक, सुनते हुए चेहरों पे छिड़क देता था नीम तारीक से हॉल में आंखें चमक उठती थीं सर हिलाता …

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Dekho Aahista Chalo

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना, ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं. काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में, ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो, जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा Gulzar

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Ek Zara Chhink Hi Do Tum

चिपचिपे दूध से नहलाते हैं, आंगन में खड़ा कर के तुम्हें शहद भी, तेल भी, हल्दी भी, ना जाने क्या क्या घोल के सर पे लुढ़काते हैं गिलासियाँ भर के औरतें गाती हैं जब तीव्र सुरों में मिल कर पाँव पर पाँव लगाए खड़े रहते हो इक पथराई सी मुस्कान …

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Raat Chupchaap Dabe Panv Chali Jati Hai

रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती है रात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहीं कांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता है ख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता है  चाँद की किरणों में वो रोज़ सा रेशम भी नहीं  चाँद की चिकनी डली है कि घुली जाती है …

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Wo Khat Ke Purze Uda Raha Tha

वो ख़त के पुरज़े उड़ा रहा था  हवाओं का रुख़ दिखा रहा था  कुछ और भी हो गया नुमायाँ  मैं अपना लिखा मिटा रहा था  उसी का इमान बदल गया है  कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था  वो एक दिन एक अजनबी को  मेरी कहानी सुना रहा था  वो उम्र …

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