Monday , May 17 2021

Mir Taqi Mir Category

Zakhm Jhele Daag Bhi Khaye Bahut – Ghazal

ज़ख्म झेले, दाग़ भी खाए बहुत दिल लगा कर, हम तो पछताए बहुत जब न तब जागह से तुम जाया किए हम तो अपनी ओर से आए बहुत देर से सू-ए-हरम आया न टुक हम मिज़ाज अपना इधर लाए बहुत फूल, गुल, शम्स-ओ-क़मर सारे ही थे पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत गर …

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Sher Ke Parde Me Maine – Ghazal

शेर के पर्दे में मैंने, ग़म सुनाया है बहुत मर्सिये ने दिल को मेरे भी, रुलाया है बहुत बेसबब आता नहीं, अब दम-ब-दम ‘आशिक़ को गश दर्द खींचा है निहायत, रंज उठाया है बहुत वादी-ओ-कोहसर में रोता हूँ, धाढें मार-मार दिलबरान-ए-शहर ने, मुझ को सताया है बहुत वा नहीं होता किसू से, …

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Umr Bhar Hum Rahe Sharabi Se – Ghazal

उम्र भर हम रहे शराबी से दिल-ए-पुरख़ूँ की, इक गुलाबी से जी डूबा जाए है, सहर से, आह रात गुजरेगी किस ख़राबी से खिलना कम कम, कली ने सीखा है उसकी आँखों की नीम ख़्वाबी से बुर्क़ा उठते ही चाँद सा निकला दाग़ हूँ उसकी बे-हिजाबी से काम थे इश्क़ में …

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Apne Tadapne Ki Mai Tadbir Pehle Kar Lu – Ghazal

अपने तड़पने की मैं तदबीर पहले कर लूँ तब फ़िक्र मैं करूँगा ज़ख़्मों को भी रफू का। यह ऐश के नहीं हैं या रंग और कुछ है हर गुल है इस चमन में साग़र भरा लहू का। बुलबुल ग़ज़ल सराई आगे हमारे मत कर सब हमसे सीखते हैं, अंदाज़ गुफ़्तगू …

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Dikhayi Diye Yu Ki Bekhud Kiya – Ghazal

फ़कीरान: आए, सदा कर चले मियाँ ख़ुश रहो, हम दुआ कर चले जो तुझ बिन, न जीने को कहते थे हम सो इस ‘अहद को अब वफ़ा कर चले शिफ़ा अपनी तक़दीर ही में न थी कि मक़्दूर तक तो दवा कर चले पड़े ऐसे अस्बाब पायान-ए-कार कि नाचार यूँ जी जलाकर चले …

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