Monday , May 17 2021

Munawwar Rana Category

Shayeri – Munawwar Rana

शायरी कुछ भी हो रुसवा नहीं होने देती मैं सियासत में चला जाऊं तो नंगा हो जाऊँ

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Patanga – Munawwar Rana

बेसबब इश्क़ में मरना मुझे मंज़ूर नहीं शमा तो चाह रही है कि पतंगा हो जाऊँ

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Roshan – Dil Shayri

अभी तक दिल में रोशन हैं तुम्हारी याद के जुगनू अभी इस राख में चिन्गारियाँ आराम करती हैं

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Nishaan – Munawwar Rana

पिछला निशान जलने का मौजूद था तो फिर क्यों हमने हाथ जलते अँगीठी पे रख दिया

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Tu Har Parinde Ko Chhat Par Utar Leta Hai – Ghazal

तू हर परिन्दे को छत पर उतार लेता है ये शौक़ वो है जो ज़ेवर उतार लेता है मैम आसमाँ की बुलन्दी पे बारहा पहुँचा मगर नसीब ज़मीं पर उतार लेता है अमीर-ए-शहर की हमदर्दियों से बच के रहो ये सर से बोझ नहीं सर उतार लेता है उसी को …

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Sehra – Munawwar Rana

सहरा-पसंद हो के सिमटने लगा हूँ मैं अँदर से लग रहा हूँ कि बँटने लगा हूँ मैं

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