Monday , May 17 2021

Rahat Indori Category

Mom Ke Paas Kabhi Aag Ko Lakar Dekhun – Ghazal

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ दिल का …

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Zalim – Rahat Indori

वो गर्दन नापता है नाप ले मगर जालिम से डर जाने का नईं

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Rai – Rahat Indori

ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है

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Ajnabi Khwahishe Seene Me Daba Bhi Na Saku – Ghazal

अजनबी ख्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ ऐसे जिद्दी हैं परिंदे के उड़ा भी न सकूँ फूँक डालूँगा किसी रोज ये दिल की दुनिया ये तेरा खत तो नहीं है कि जला भी न सकूँ मेरी गैरत भी कोई शय है कि महफ़िल में मुझे उसने इस तरह बुलाया …

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Jawani – Rahat Indori

लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यों हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं मोड़  होता हैं जवानी का संभलने  के लिए और सब लोग यही आ के फिसलते क्यों हैं

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Andhere Charo Taraf Saay Saay Karne Lage – Ghazal

अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे लहूलोहान पड़ा था ज़मीं पे इक सूरज परिन्दे अपने परों से हवाएँ करने लगे ज़मीं पे आ गए आँखों से टूट कर आँसू …

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