Monday , May 17 2021

Rajesh Reddy Category

Diwana – Dil Shayri

हर किसी के आगे यूँ खुलता कहाँ है अपना दिल, सामने दीवानों को देखा तो दीवाना खुला 

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Yaade – Rajesh Reddy

कंजूस कोई जैसे गिनता रहे सिक्कों को, ऐसे ही मैं यादों के लम्हात बरतता हूँ ।

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Takraar – Dil Shayri

आज दिल को अक़्ल ने जल्दी ही राज़ी कर लिया रोज़ से कुछ आज की तकरार थोड़ी कम रही ।

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Duniya – Rajesh Reddy

या तो इस दुनिया के मनवाने में कोई बात थी, या हमारी नीयत-ए-इनकार थोड़ी कम रही ।

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Ek Jehar Ke Dariya Ko – Ghazal

इक ज़हर के दरिया को दिन-रात बरतता हूँ । हर साँस को मैं, बनकर सुक़रात, बरतता हूँ । खुलते भी भला कैसे आँसू मेरे औरों पर, हँस-हँस के जो मैं अपने हालात बरतता हूँ । कंजूस कोई जैसे गिनता रहे सिक्कों को, ऐसे ही मैं यादों के लम्हात बरतता हूँ …

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Apne Sach Me Jhoot – Ghazal

अपने सच में झूठ की मिक्दार थोड़ी कम रही । कितनी कोशिश की, मगर, हर बार थोड़ी कम रही । कुछ अना भी बिकने को तैयार थोड़ी कम रही, और कुछ दीनार की झनकार थोड़ी कम रही । ज़िन्दगी ! तेरे क़दम भी हर बुलन्दी चूमती, तू ही झुकने के लिए …

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