Monday , May 17 2021

Waseem Barelvi Category

Naam – Shayar

आते-आते मेरा नाम-सा रह गया  उस के होंठों पे कुछ काँपता रह गया

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Charag – Shayar

मैं उस को भूल गया हूँ ये कौन मानेगा  किसी चराग़ के बस में धुआँ नहीं होता 

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Charaag – Shayar

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटायेगा  किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता 

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Ghar – Shayar

घर सजाने का तस्सवुर तो बहुत बाद का है  पहले ये तय हो कि इस घर को बचायें कैसे 

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Chehra – Shayar

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे  तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे

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Aansu – Shayar

ख़ुशी की आँख में आँसू की भी जगह रखना बुरे ज़माने कभी पूछकर नहीं आते

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