Dagh Dehlvi

Ye Baat Baat Men Kyaa Naazukii Nikaltii Hai Dagh Dehlvi Ghazals

ये बात बात में क्या नाज़ुकी निकलती है दबी दबी तिरे लब से हँसी निकलती है ठहर ठहर के जला दिल को एक बार न फूँक कि इस में बू-ए-मोहब्बत अभी निकलती है बजाए शिकवा भी देता हूँ मैं दुआ उस को मिरी ज़बाँ से करूँ क्या यही निकलती है ख़ुशी में हम ने ये शोख़ी कभी नहीं देखी दम-ए-इताब जो रंगत तिरी निकलती है हज़ार बार जो माँगा करो तो क्या हासिल दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है अदा से तेरी मगर खिंच रहीं हैं...

Zaahid Na Kah Burii Ki Ye Mastaane Aadmii Hain Dagh Dehlvi Ghazals

ज़ाहिद न कह बुरी कि ये मस्ताने आदमी हैं तुझ को लिपट पड़ेंगे दीवाने आदमी हैं ग़ैरों की दोस्ती पर क्यूँ ए’तिबार कीजे ये दुश्मनी करेंगे बेगाने आदमी हैं जो आदमी पे गुज़री वो इक सिवा तुम्हारे क्या जी लगा के सुनते अफ़्साने आदमी हैं क्या जुरअतें जो हम को दरबाँ तुम्हारा टोके कह दो कि ये तो जाने-पहचाने आदमी हैं मय बूँद भर पिला कर क्या हँस रहा है साक़ी भर भर के पीते आख़िर पैमाने आदमी हैं तुम ने हमारे...

Vo Zamaana Nazar Nahiin Aataa Dagh Dehlvi Ghazals

वो ज़माना नज़र नहीं आता कुछ ठिकाना नज़र नहीं आता जान जाती दिखाई देती है उन का आना नज़र नहीं आता इश्क़ दर-पर्दा फूँकता है आग ये जलाना नज़र नहीं आता इक ज़माना मिरी नज़र में रहा इक ज़माना नज़र नहीं आता दिल ने इस बज़्म में बिठा तो दिया उठ के जाना नज़र नहीं आता रहिए मुश्ताक़-ए-जल्वा-ए-दीदार हम ने माना नज़र नहीं आता ले चलो मुझ को राह-रवान-ए-अदम याँ ठिकाना नज़र नहीं आता दिल पे बैठा कहाँ से तीर-ए-निगाह...

Milaate Ho Usii Ko Khaak Men Jo Dil Se Miltaa Hai Dagh Dehlvi Ghazals

मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है मिरी जाँ चाहने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है कहीं है ईद की शादी कहीं मातम है मक़्तल में कोई क़ातिल से मिलता है कोई बिस्मिल से मिलता है पस-ए-पर्दा भी लैला हाथ रख लेती है आँखों पर ग़ुबार-ए-ना-तवान-ए-क़ैस जब महमिल से मिलता है भरे हैं तुझ में वो लाखों हुनर ऐ मजमा-ए-ख़ूबी मुलाक़ाती तिरा गोया भरी महफ़िल से मिलता है मुझे आता है क्या क्या रश्क वक़्त-ए-ज़ब्ह उस...