Faiz Ahmad Faiz

Nasiib Aazmaane Ke Din Aa Rahe Hain Faiz Ahmad Faiz Ghazals

नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं क़रीब उन के आने के दिन आ रहे हैं जो दिल से कहा है जो दिल से सुना है सब उन को सुनाने के दिन आ रहे हैं अभी से दिल ओ जाँ सर-ए-राह रख दो कि लुटने लुटाने के दिन आ रहे हैं टपकने लगी उन निगाहों से मस्ती निगाहें चुराने के दिन आ रहे हैं सबा फिर हमें पूछती फिर रही है चमन को सजाने के दिन आ रहे हैं चलो ‘फ़ैज़’ फिर से कहीं दिल लगाएँ सुना है ठिकाने के दिन आ रहे हैं...

Ye Kis Khalish Ne Phir Is Dil Men Aashiyaana Kiyaa Faiz Ahmad Faiz Ghazals

ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया फिर आज किस ने सुख़न हम से ग़ाएबाना किया ग़म-ए-जहाँ हो रुख़-ए-यार हो कि दस्त-ए-अदू सुलूक जिस से किया हम ने आशिक़ाना किया थे ख़ाक-ए-राह भी हम लोग क़हर-ए-तूफ़ाँ भी सहा तो क्या न सहा और किया तो क्या न किया ख़ुशा कि आज हर इक मुद्दई के लब पर है वो राज़ जिस ने हमें राँदा-ए-ज़माना किया वो हीला-गर जो वफ़ा-जू भी है जफ़ा-ख़ू भी किया भी ‘फ़ैज़’ तो किस...

Phir Hariif E Bahaar Ho Baithe Faiz Ahmad Faiz Ghazals

फिर हरीफ़-ए-बहार हो बैठे जाने किस किस को आज रो बैठे थी मगर इतनी राएगाँ भी न थी आज कुछ ज़िंदगी से खो बैठे तेरे दर तक पहुँच के लौट आए इश्क़ की आबरू डुबो बैठे सारी दुनिया से दूर हो जाए जो ज़रा तेरे पास हो बैठे न गई तेरी बे-रुख़ी न गई हम तिरी आरज़ू भी खो बैठे ‘फ़ैज़’ होता रहे जो होना है शेर लिखते रहा करो बैठे – Faiz Ahmad Faiz phir harīf-e-bahār ho baiThe jaane kis kis ko aaj ro...

Yuun Sajaa Chaand Ki Jhalkaa Tire Andaaz Kaa Rang Faiz Ahmad Faiz Ghazals

यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग यूँ फ़ज़ा महकी कि बदला मिरे हमराज़ का रंग साया-ए-चश्म में हैराँ रुख़-ए-रौशन का जमाल सुर्ख़ी-ए-लब में परेशाँ तिरी आवाज़ का रंग बे-पिए हूँ कि अगर लुत्फ़ करो आख़िर-ए-शब शीशा-ए-मय में ढले सुब्ह के आग़ाज़ का रंग चंग ओ नय रंग पे थे अपने लहू के दम से दिल ने लय बदली तो मद्धम हुआ हर साज़ का रंग इक सुख़न और कि फिर रंग-ए-तकल्लुम तेरा हर्फ़-ए-सादा को इनायत करे...