Javed Akhtar

Na Khushii De To Kuchh Dilaasa De Javed Akhtar Ghazals

न ख़ुशी दे तो कुछ दिलासा दे दोस्त जैसे हो मुझ को बहला दे आगही से मिली है तन्हाई आ मिरी जान मुझ को धोका दे अब तो तकमील की भी शर्त नहीं ज़िंदगी अब तो इक तमन्ना दे ऐ सफ़र इतना राएगाँ तो न जा न हो मंज़िल कहीं तो पहुँचा दे तर्क करना है गर तअ’ल्लुक़ तो ख़ुद न जा तू किसी से कहला दे – Javed Akhtar na ḳhushī de to kuchh dilāsa de dost jaise ho mujh ko bahlā de āgahī se milī hai tanhā.ī aa mirī...

Ye Tasallii Hai Ki Hain Naashaad Sab Javed Akhtar Ghazals

ये तसल्ली है कि हैं नाशाद सब मैं अकेला ही नहीं बर्बाद सब सब की ख़ातिर हैं यहाँ सब अजनबी और कहने को हैं घर आबाद सब भूल के सब रंजिशें सब एक हैं मैं बताऊँ सब को होगा याद सब सब को दा’वा-ए-वफ़ा सब को यक़ीं इस अदाकारी में हैं उस्ताद सब शहर के हाकिम का ये फ़रमान है क़ैद में कहलाएँगे आज़ाद सब चार लफ़्ज़ों में कहो जो भी कहो उस को कब फ़ुर्सत सुने फ़रियाद सब तल्ख़ियाँ कैसे न हूँ अशआ’र में हम पे...

Nigal Gae Sab Kii Sab Samundar Zamiin Bachii Ab Kahiin Nahiin Hai Javed Akhtar Ghazals

निगल गए सब की सब समुंदर ज़मीं बची अब कहीं नहीं है बचाते हम अपनी जान जिस में वो कश्ती भी अब कहीं नहीं है बहुत दिनों बा’द पाई फ़ुर्सत तो मैं ने ख़ुद को पलट के देखा मगर मैं पहचानता था जिस को वो आदमी अब कहीं नहीं है गुज़र गया वक़्त दिल पे लिख कर न जाने कैसी अजीब बातें वरक़ पलटता हूँ मैं जो दिल के तो सादगी अब कहीं नहीं है वो आग बरसी है दोपहर में कि सारे मंज़र झुलस गए हैं यहाँ सवेरे जो ताज़गी थी...

Zaraa Mausam To Badlaa Hai Magar Pedon Kii Shaakhon Par Nae Patton Ke Aane Men Abhii Kuchh Din Lagenge Javed Akhtar Ghazals

ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे कभी हम को यक़ीं था ज़ो’म था दुनिया हमारी जो मुख़ालिफ़ है तो हो जाए मगर तुम मेहरबाँ हो हमें ये बात वैसे याद तो अब क्या है लेकिन हाँ इसे यकसर भुलाने में अभी कुछ दिन लगेंगे जहाँ इतने मसाइब हों जहाँ इतनी परेशानी किसी का...