Fariyaad Kii Koii Lai Nahiin Hai Mirza Ghalib Ghazals

फ़रियाद की कोई लय नहीं है नाला पाबंद-ए-नय नहीं है क्यूँ बोते हैं बाग़बाँ तोंबे गर बाग़ गदा-ए-मय नहीं है हर-चंद हर एक शय में तू है पर तुझ सी कोई शय नहीं है हाँ खाइयो मत फ़रेब-ए-हस्ती हर-चंद कहें कि है नहीं है शादी से गुज़र कि ग़म न होवे उरदी जो न हो तो दय नहीं है क्यूँ रद्द-ए-क़दह करे है ज़ाहिद मय है ये मगस की क़य नहीं है हस्ती है न कुछ अदम है ‘ग़ालिब’ आख़िर तू क्या है ऐ नहीं है...

Us Ke Pahluu Se Lag Ke Chalte Hain Jaun Eliya Ghazals

उस के पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं बंद है मय-कदों के दरवाज़े हम तो बस यूँही चल निकलते हैं मैं उसी तरह तो बहलता हूँ और सब जिस तरह बहलते हैं वो है जान अब हर एक महफ़िल की हम भी अब घर से कम निकलते हैं क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं है उसे दूर का सफ़र दर-पेश हम सँभाले नहीं सँभलते हैं शाम फ़ुर्क़त की लहलहा उठी वो हवा है कि ज़ख़्म भरते हैं है अजब...

Kab Tak Dil Kii Khair Manaaen Kab Tak Rah Dikhlaaoge Faiz Ahmad Faiz Ghazals

कब तक दिल की ख़ैर मनाएँ कब तक रह दिखलाओगे कब तक चैन की मोहलत दोगे कब तक याद न आओगे बीता दीद उम्मीद का मौसम ख़ाक उड़ती है आँखों में कब भेजोगे दर्द का बादल कब बरखा बरसाओगे अहद-ए-वफ़ा या तर्क-ए-मोहब्बत जो चाहो सो आप करो अपने बस की बात ही क्या है हम से क्या मनवाओगे किस ने वस्ल का सूरज देखा किस पर हिज्र की रात ढली गेसुओं वाले कौन थे क्या थे उन को क्या जतलाओगे ‘फ़ैज़’ दिलों के भाग में है घर...

Agarche Main Ik Chataan Saa Aadmii Rahaa Huun Mohsin Naqvi Ghazals

अगरचे मैं इक चटान सा आदमी रहा हूँ मगर तिरे बा’द हौसला है कि जी रहा हूँ वो रेज़ा रेज़ा मिरे बदन में उतर रहा है मैं क़तरा क़तरा उसी की आँखों को पी रहा हूँ तिरी हथेली पे किस ने लिक्खा है क़त्ल मेरा मुझे तो लगता है मैं तिरा दोस्त भी रहा हूँ खुली हैं आँखें मगर बदन है तमाम पत्थर कोई बताए मैं मर चुका हूँ कि जी रहा हूँ कहाँ मिलेगी मिसाल मेरी सितमगरी की कि मैं गुलाबों के ज़ख़्म काँटों से सी रहा हूँ...

Har Ek Ruuh Men Ik Gam Chhupaa Lage Hai Mujhe Jaan Nisar Akhtar Ghazals

हर एक रूह में इक ग़म छुपा लगे है मुझे ये ज़िंदगी तो कोई बद-दुआ लगे है मुझे पसंद-ए-ख़ातिर-ए-अहल-ए-वफ़ा है मुद्दत से ये दिल का दाग़ जो ख़ुद भी भला लगे है मुझे जो आँसुओं में कभी रात भीग जाती है बहुत क़रीब वो आवाज़-ए-पा लगे है मुझे मैं सो भी जाऊँ तो क्या मेरी बंद आँखों में तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे मैं सोचता था कि...

Ishrat E Qatra Hai Dariyaa Men Fanaa Ho Jaanaa Mirza Ghalib Ghazals

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना तुझ से क़िस्मत में मिरी सूरत-ए-क़ुफ़्ल-ए-अबजद था लिखा बात के बनते ही जुदा हो जाना दिल हुआ कशमकश-ए-चारा-ए-ज़हमत में तमाम मिट गया घिसने में इस उक़दे का वा हो जाना अब जफ़ा से भी हैं महरूम हम अल्लाह अल्लाह इस क़दर दुश्मन-ए-अरबाब-ए-वफ़ा हो जाना ज़ोफ़ से गिर्या मुबद्दल ब-दम-ए-सर्द हुआ बावर आया हमें पानी का हवा हो जाना दिल से...

Kabhii Khud Pe Kabhii Haalaat Pe Ronaa Aayaa Sahir Ludhianvi Ghazals

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया – Sahir Ludhianvi kabhī ḳhud pe kabhī hālāt pe ronā aayā baat niklī to har ik baat pe ronā aayā ham to samjhe...

Duniyaa Ke Sitam Yaad Na Apnii Hii Vafaa Yaad Jigar Moradabadi Ghazals

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद मैं शिकवा ब-लब था मुझे ये भी न रहा याद शायद कि मिरे भूलने वाले ने किया याद छेड़ा था जिसे पहले-पहल तेरी नज़र ने अब तक है वो इक नग़्मा-ए-बे-साज़-ओ-सदा याद जब कोई हसीं होता है सरगर्म-ए-नवाज़िश उस वक़्त वो कुछ और भी आते हैं सिवा याद क्या जानिए क्या हो गया अरबाब-ए-जुनूँ को मरने की अदा याद न जीने की अदा याद मुद्दत हुई इक...

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