आफताब की गर्मी से -अश्क़ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

आफताब की गर्मी से दरिया का पानी ख़त्म नहीं होता,लैला के इंकार से मजनू का जज़्बा कम नहीं होता,फ़िराक की मुसीबत हो या यार के वस्ल की लज़्ज़त,किसी भी हाल में अश्कों का बहना काम नहीं होता।

अश्क़ शायरी

Related Post

जान-ए-तन्हा पे गुजर जायें हजारो सदमें,आँख से अश्क रवाँ हों ये ज़रूरी तो नहीं। अश्क़ शायरी

रेत भरी है आँखों में आँसू से तुम धो लेना,कोई सूखा पेड़ मिले तो उससे लिपटकर रो लेना। अश्क़ शायरी

जब जब तुमसे मिलने की उम्मीद नजर आई,तब तब मेरे पैरों में ज़ंजीर नजर आई,निकल पड़े इन आँखों से हजारों आँसू,हर आँसू में आपकी तस्वीर नजर आई। - अश्क़ शायरी

मंज़र अभी आंसुओं का चल रहा है,लफ्ज़ खामोश ही रहे तो अच्छा होगा। अश्क़ शायरी

रो लेते हैं कभी कभी,ताकि आंसुओं को भी कोई शिकायत ना रहे। अश्क़ शायरी

कौन कहता है किआंसुओं में वज़न नहीं होता,एक भी छलक जाता हैतो मन हल्का हो जाता है । अश्क़ शायरी

leaf-right
leaf-right