इश्क़ को भी इश्क़ -इश्क़ शायरी

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  • October 31, 2021

इश्क़ को भी इश्क़ हो तोफिर देखूं मैं इश्क़ को भी,कैसे तड़पे, कैसे रोये,इश्क़ अपने इश्क़ में।

इश्क़ शायरी

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गलती से इश्क हुआ( एडमिन द्वारा दिनाँक 09-07-2015 को प्रस्तुत )उससे कह दो किमेरी सज़ा कुछ कम कर दे,हम पेशे से मुज़रिम नहीं हैंबस गलती से इश्क हुआ था । - इश्क़ शायरी

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महफ़िल ना सही तन्हाई तो मिलती है,मिलना न सही जुदाई तो मिलती है,कौन कहता इश्क़ में कुछ नहीं मिलता?वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है। - इश्क़ शायरी

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