इश्क़ में बेचैनी -इश्क़ शायरी

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  • October 31, 2021

तेरी जब याद आती है तो फिर साँसें नहीं आती,इश्क़ में हम सी बेचैनी कहाँ पर पाओगे हमदम।

इश्क़ शायरी

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अकेले हम शामिल नहीं( प्रदूम कुमार द्वारा दिनाँक 11-06-2016 को प्रस्तुत )अकेले हम ही शामिल नहीं हैं इस जुर्म में जनाब, नजरें जब भी मिली थी मुस्कराये तुम भी थे। - इश्क़ शायरी

इश्क है वही जो हो एक तरफा,इजहार-ए-इश्क तो ख्वाहिश बन जाती है,है अगर इश्क तो आँखों में दिखाओ,जुबां खोलने से ये नुमाइश बन जाती है। इश्क़ शायरी

ना रूठना ना मनाना, ना गिला ना शिकवा कर,गर करना है तो बस इश्क़ कर, बे-इन्तहा कर। - इश्क़ शायरी

इश्क़ करने से पहले जात नहीं पूछी जाती महबूब की कुछ तो है दुनिया में जो अाज तक मज़हबी नही हुअा ।। इश्क़ शायरी

खुदा की रहमत में अर्जियाँ नहीं चलतीं,दिलों के खेल में खुदगर्जियाँ नहीं चलतीं । इश्क़ शायरी

लगाके इश्क़ की बाजी सुना है दिल दे बैठे हो,मुहब्बत मार डालेगी अभी तुम फूल जैसे हो। इश्क़ शायरी

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