इश्क़ ही ख़ुदा – इश्क़ शायरी

जो मिला मुसाफ़िर वो रास्ते बदल डाले,
दो क़दम पे थी मंज़िल फ़ासले बदल डाले।

- इश्क़ शायरी

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यह मेरा इश्क़ था( Admin द्वारा दिनाँक 23-09-2015 को प्रस्तुत )यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इन्तहा,कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से । - इश्क़ शायरी

तजुर्बा इश्क़ का( एडमिन द्वारा दिनाँक 30-12-2015 को प्रस्तुत )तजुर्बा एक ही काफी था बयान करने के लिए,मैंने देखा ही नहीं इश्क़ दोबारा करके। - इश्क़ शायरी

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