उसके बिना जीना -शिक़वा शायरी

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  • October 31, 2021

जिंदगी हसीन है पर जीना नहीं आता,हर चीज में नशा है पर पीना नहीं आता,सब मेरे बगैर जी सकते हैंबस मुझे ही किसी के बिना जीना नहीं आता।

शिक़वा शायरी

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कभी तो अपना वजूदहम पर लुटा के देखक्यों दो कदम चलकर तेरायकीन ठहर जाता है । - शिक़वा शायरी

दिल पे बोझ लेकर तू मुलाकात को न आ,मिलना है इस तरह तो बिछड़ना कबूल है। - शिक़वा शायरी

ऐ सुकून - कभी दिल केहाल ही पूँछ लिया करो - । शिक़वा शायरी

ज़माना खड़ा है( एडमिन द्वारा दिनाँक 22-04-2015 को प्रस्तुत )ज़माना खड़ा है हाथों में पत्थर लेकर,कहाँ तक भागूं शीशे का मुक़द्दर लेकर । - शिक़वा शायरी

दिमाग पर जोर डालकर गिनते होगलतियाँ मेरी,कभी दिल पर हाथ रख कर पूछनाकि कसूर किसका था। - शिक़वा शायरी

क्यों तन्हा कर देते हो यूँ दूर जाकर,इंतज़ार करते हैं हम बेक़रार होकर,वक्त बदलता है माना हमने,न छोड़ कर जाया करो अनजान बनकर। - शिक़वा शायरी

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