उसके हिस्से का वक्त -तन्हाई शायरी

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  • October 31, 2021

माना कि आज उसका मुझसे कोई वास्ता नहीं रहा,मगर आज भी उसके हिस्से का वक्त तन्हा गुजरता है।

तन्हाई शायरी

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तेरे बगैर मेरी ज़िन्दगी( एडमिन द्वारा दिनाँक 25-10-2018 को प्रस्तुत )मैं अपनी ख़ाक उठाकर कहाँ-कहाँ घूमूं,तेरे बगैर मेरी ज़िन्दगी की कीमत क्या है।-------------------------------तेरे बगैर भी तो गनीमत है ज़िन्दगी,खुद को गँवा कर कौन तेरी जुस्तजू...

साँसों में तपिश( एडमिन द्वारा दिनाँक 25-11-2016 को प्रस्तुत )साँसों में तपिश, यादों में कसक, आहों में नमी है,इस दिसंबर में सब कुछ है बस उसकी कमी है। - तन्हाई शायरी

फिर कहीं दूर से एक बार सदा दो मुझको,मेरी तन्हाई का एहसास दिला दो मुझको,तुम तो चाँद हो तुम्हें मेरी ज़रुरत क्या है,मैं दिया हूँ किसी चौखट पे जला दो मुझको। तन्हाई शायरी

तू नहीं तो ज़िंदगी में और क्या रह जायेगा,दूर तक तन्हाइयों का सिलसिला रह जायेगा,आँखें ताजा मंजरों में खो तो जायेंगी मगर,दिल पुराने मौसमों को ढूंढ़ता रह जायेगा। - तन्हाई शायरी

ज़िन्दगी वो थी( एडमिन द्वारा दिनाँक 19-11-2015 को प्रस्तुत )उस से बिछड़े तो मालूम हुआकि मौत भी कोई चीज़ है फ़राज़ज़िन्दगी वो थी.......... जो हमउसकी महफ़िल में गुज़ार आए । - तन्हाई शायरी

कहीं पर शाम ढलती है कहीं पर रात होती है,अकेले गुमसुम रहते हैं न किसी से बात होती है,तुमसे मिलने की आरज़ू दिल बहलने नहीं देती,तन्हाई में आँखों से रुक-रुक के बरसात होती है। -...

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