एक ग़म से भी – ग़म शायरी

ढूंढ़ लाया हूँ ख़ुशी की छाँव जिसके वास्ते,
एक ग़म से भी उसे दो-चार करना है मुझे।

- ग़म शायरी

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जिस दिये को हम( मोहन नागोसे द्वारा दिनाँक 08-05-2018 को प्रस्तुत )हम भी कभी मुस्कुराया करते थे, उजाले मेरे दर पर शोर मचाया करते थे, उसी दिए ने जला दिया मेरे हाथों को, जिस दिये...

वो एक रात जला( एडमिन द्वारा दिनाँक 08-05-2018 को प्रस्तुत )वो एक रात जला तो उसे चिराग कह दिया,हम बरसों से जल रहे हैं कोई तो खिताब दो। - ग़म शायरी

तुमने भी हमें बस एक दीये की तरह समझा,रात हुई तो जला दिया सुबह हुई तो बुझा दिया। - ग़म शायरी

वफ़ा के शीशमहल में सजा लिया मैनें,वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें, - ग़म शायरी

प्यार की राह में ग़म का अँधेरा आता क्यूँ है,जिसको हमने चाहा वही रुलाता क्यूँ है,वो मेरे नसीब में नहीं है तो खुदा,बार-बार हमें उसी से मिलाता क्यूँ है। - ग़म शायरी

ग़म-ए-आरज़ू तेरी राह में,शब्-ए-आरज़ू तेरी चाह में,जो उजड़ गया वो बसा नहीं,जो बिछड़ गया वो मिला नहीं। ग़म शायरी

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