ऐसे तो गम नहीं मिले -ग़म शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले,तुझ सा नहीं मिला कोई, लोग तो कम नहीं मिले,एक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है,जिनको न सह सके ये दिल, ऐसे तो गम नहीं मिले।

ग़म शायरी

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शायरी तोहफे में ग़म( एडमिन द्वारा दिनाँक 21-09-2018 को प्रस्तुत )दे गया ग़म मुझे तोहफे में मिला वो जब भी,मैंने एक शख्स को क्यूँ कर भला समझा अपना। - ग़म शायरी

हुस्न खो जायेगा प्यार मिट जायेगा,वक़्त के हाथ सबकुछ लुट जायेगा,हाँ रहेगी मगर याद मेरे दिल में तेरी,ग़म का समंदर तो सिमट जायेगा। ग़म शायरी

बदन में आग सी है चेहरा गुलाब जैसा है,कि ज़हर-ए-ग़म का नशा भी शराब जैसा है,इसे कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही,दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है। ग़म शायरी

हमसे पूछो किसीको खोने का ग़म क्या होता है,हँसते हँसते रोने का दर्द क्या होता है,खुदा उसी से क्यों मिला देता है हमें,जिसका साथ किस्मत में नहीं होता है। - ग़म शायरी

रोज एक नई तकलीफ रोज एक नया गम,ना जाने कब ऐलान होगा कि मर गए हम। ग़म शायरी

ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले,तुझ सा नहीं मिला कोई, लोग तो कम नहीं मिले,एक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है,जिनको न सह सके ये दिल, ऐसे तो गम नहीं मिले।...

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