कभी जो मिलें फुरसत -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

कभी जो मिलें फुरसत तो बताना जरूर - वो कौन सी मौहब्बत थी जो मैं ना दे सका ।

शिक़वा शायरी

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करूँगा क्या जो हो गया नाकाम मोहब्बत में,मुझे तो कोई और काम भी नहीं आता इसके सिवा। - शिक़वा शायरी

कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था;सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था;सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है;जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था। शिक़वा शायरी

न मोहब्बत संभाली गई,न नफरतें पाली गईं,बङा अफसोस है उस जिंदगी का,जो तेरे पीछे खाली गई l - शिक़वा शायरी

मोहब्बत में लाखों ज़ख्म( एडमिन द्वारा दिनाँक 05-06-2016 को प्रस्तुत )मोहब्बत में लाखों ज़ख्म खाए हमने,अफ़सोस उन्हें हम पर ऐतबार नहीं,मत पूछो क्या गुजरती है दिल पर,जब वो कहते है हमें तुमसे प्यार नहीं। -...

तुम क्यों बनाते हो रेत का महल,एक दिन तुम्हीं इन्हें मिटाओगे,आज तुम कहते हो कि तुम मेरे हो,कल मेरा नाम तक भूल जाओगे। शिक़वा शायरी

अजीब मिठास है मुझ गरीब के खून में भी,जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है । शिक़वा शायरी

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