कम से कम अपने -तारीफ़ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

कम से कम अपने बाल तो बाँध लिया करो ।कमबख्त..बेवजह मौसम बदल दिया करते हैं ।

तारीफ़ शायरी

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मस्त-ए-शबाब( एडमिन द्वारा दिनाँक 28-10-2018 को प्रस्तुत )गले मिला है वो मस्त-ए-शबाब बरसों में,हुआ है दिल को सुरूर-ए-शराब बरसों में,निगाह-ए-मस्त से उसकी हुआ ये हाल मेरा,कि जैसे पी हो किसी ने शराब बरसों में। -...

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चाँद सा चेहरा( एडमिन द्वारा दिनाँक 21-01-2019 को प्रस्तुत )आसमां में खलबली है सब यही पूछ रहे हैं,कौन फिरता है ज़मीं पे चाँद सा चेहरा लिए। - तारीफ़ शायरी

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