काँच की तरह -दर्द शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

टूटे हुए काँच की तरहचकना-चूर हो गया हूँकिसी को चुभ न जाऊँइसलिए सबसे दूर हो गया हूँ।

दर्द शायरी

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इसी ख्याल से गुज़री है शाम-ए-ग़म अक्सर,कि दर्द हद से जो गुज़रेगा तो मुस्कुरा दूंगा - ! दर्द शायरी

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जख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे,आँसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे,ये मत पूछना किसने दर्द दिया,वरना कुछ अपनों के चेहरे उतर जाएंगे। - दर्द शायरी

मोहब्बत बड़ी बेदर्द( एडमिन द्वारा दिनाँक 08-12-2016 को प्रस्तुत )कागज की कश्ती से पार जाने की ना सोच,उड़ते हुए तूफानों को हाथ लगाने की ना सोच,ये मोहब्बत बड़ी बेदर्द है इससे खेल ना कर,मुनासिब हो...

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