कुछ इस अदा से -तारीफ़ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

कुछ इस अदा से आज वो पहलू-नशीं रहे,जब तक हमारे पास रहे हम नहीं रहे।

तारीफ़ शायरी

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क़यामत टूट पड़ती है ज़रा से होंठ हिलने पर,ना जाने हश्र क्या होगा अगर वो मुस्कुराये तो। तारीफ़ शायरी

चुप ना होगी हवा भी, कुछ कहेगी घटा भी,और मुमकिन है तेरा, जिक्र कर दे खुद़ा भी।फिर तो पत्थर भी शायद ज़ब्त से काम लेंगे,हुस्न की बात चली तो, सब तेरा नाम लेंगे। तारीफ़ शायरी

काज़ल का कहर( लकी द्वारा दिनाँक 23-01-2019 को प्रस्तुत )बड़ा हैरान हूं देखकर आईने का ज़िगर,एक तो तेरी कातिल नज़रऔरउस पर काज़ल का कहर। - तारीफ़ शायरी

आँखों में नील कंवल( एडमिन द्वारा दिनाँक 22-06-2016 को प्रस्तुत )लोग कहते हैं जिन्हें नील कंवल वो तो क़तील,शब को इन झील सी आँखों में खिला करते है।~ क़तील शिफ़ई - तारीफ़ शायरी

गले मिला है वो मस्त-ए-शबाब बरसों में,हुआ है दिल को सुरूर-ए-शराब बरसों में,निगाह-ए-मस्त से उसकी हुआ ये हाल मेरा,कि जैसे पी हो किसी ने शराब बरसों में। - तारीफ़ शायरी

चाँद की औकात( नीरज चौधरी द्वारा दिनाँक 13-10-2018 को प्रस्तुत )जरा उतर के देख मेरे दिल की गहराइयों में,कि तुझे भी मेरे जज़्बात का पता चले,दिल करता है चाँद को खड़ा कर दूं तेरे आगे,जरा...

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