क्यूं वो आज़माते हैं -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

उस को मालूम है कि उस बिन हम टूट जाते हैं,फिर क्यूं वो आज़माते हैं हम को बिछड़ बिछड़ कर।

शिक़वा शायरी

Related Post

उम्र भर खाली यूँ हीदिल का मकाँ रहने दिया, शिक़वा शायरी

हमसफर कोई होता तोहम भी बाँट लेते दूरियाँ,राह चलते लोग भलाक्या समझेंगे मेरी मजबूरियाँ। शिक़वा शायरी

मेरी चाहत को मेरी हालत की तराजू में ना तोल,मैंने वो ज़ख्म भी खाऐं हैं जो मेरी किस्मत में नहीं थे । - शिक़वा शायरी

याद करना ना लौटा सकोगे( एडमिन द्वारा दिनाँक 14-10-2015 को प्रस्तुत )मैं अपनी चाहतों का हिस्सा जो लेने बैठ जाऊं,तो सिर्फ मेरा याद करना भी ना लौटा सकोगे । - शिक़वा शायरी

आइने की तरह( एडमिन द्वारा दिनाँक 17-04-2016 को प्रस्तुत )आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले,जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए। - शिक़वा शायरी

तुम क्यों ऐसे खोये खोये रहते हो,तुम क्यों ऐसे गुमसुम से रहते हो,कौन सा ग़म है तुम्हें जो सबसे छिपाते हो,किसलिए हर बात पर अपना जी जलाते हो,क्यों आज तक तुमने किसी को अपना बनाया...

leaf-right
leaf-right