ख्वाबों का क़त्ल -ग़म शायरी

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  • October 31, 2021

रोज करते हैं कत्ल - हम अपने ख्वाबों का,हकीकत में जीना इतना आसान नहीं होता।

ग़म शायरी

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अदा ग़म भुलाने की( आकाश सिंह द्वारा दिनाँक 15-01-2018 को प्रस्तुत )ख्यालों में मेरे कभी आप भी खोये होंगे,खुली आँखों से कभी आप भी सोये होंगे,माना हँसी अदा है गम भुलाने की लेकिनहँसते-हँसते कभी आप...

एक वो हैं कि जिन्हें उनकी ख़ुशी ले डूबी,एक हम हैं कि जिन्हें ग़म ने उबरने न दिया। - ग़म शायरी

ग़म सुना दिया( एडमिन द्वारा दिनाँक 11-01-2018 को प्रस्तुत )मैंने अपना ग़म आसमान को सुना दिया...शहर के लोगों ने बारिश का मजा लिया। - ग़म शायरी

गम की आतिशबाजी( एडमिन द्वारा दिनाँक 30-11-2016 को प्रस्तुत )फिर तेरा चर्चा हुआ, आँखें हमारी नम हुई,धड़कनें फिर बढ़ गई, साँस फिर बेदम हुई,चाँदनी की रात थी, तारों का पहरा भी था,इसीलिये शायद गम की...

आधी से ज्यादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ,अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है। - ग़म शायरी

ज़िन्दगी हमारी यूँ सितम हो गई,खुशी न जाने कहाँ दफन हो गई,लिखी खुदा ने मोहब्बत सबकी तकदीर में,हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो गई। ग़म शायरी

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