गम है हर एक को -ग़म शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

गम तो है हर एक को,मगर हौंसला है जुदा- जुदा,कोई टूट कर बिखर गया,कोई मुस्कुरा के चल दिया ।

ग़म शायरी

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वो सूरज की तरह आग उगलते रहे, हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे, वो बीते वक़्त थे, उन्हें आना न था, हम सारी रात करवट बदलते रहे। ग़म शायरी

देखा पलट के उसने चाहत उसे भी थी,दुनिया से मेरी तरह शिकायत उसे भी थी,वो रोया बहुत मुझको परेशान देख कर,उस दिन पता चला की मेरी जरुरत उसे भी थी। ग़म शायरी

ख्यालों में मेरे कभी आप भी खोये होंगे,खुली आँखों से कभी आप भी सोये होंगे,माना हँसी अदा है गम भुलाने की लेकिनहँसते-हँसते कभी आप भी रोये होंगे। ग़म शायरी

ख्वाबों का क़त्ल( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-09-2017 को प्रस्तुत )रोज करते हैं कत्ल... हम अपने ख्वाबों का,हकीकत में जीना इतना आसान नहीं होता। - ग़म शायरी

तेरे जाने के बाद( एडमिन द्वारा दिनाँक 07-12-2016 को प्रस्तुत )एक तेरे चले जाने के बाद से हमें,किसी का भी यहाँ ऐतबार न रहा,और किसी से तो क्या करेंगे मोहब्बत,जब अपनी ही जिंदगी से प्यार...

एक वो हैं कि जिन्हें उनकी ख़ुशी ले डूबी,एक हम हैं कि जिन्हें ग़म ने उबरने न दिया। ग़म शायरी

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