गरीब का जनाजा -गरीबी पर शायरी

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  • October 31, 2021

जनाजा बहुत भारी था उस गरीब का,शायद सारे अरमान साथ लिए जा रहा था।

गरीबी पर शायरी

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ऐ सियासत... तूने भी इस दौर में कमाल कर दिया,गरीबों को गरीब अमीरों को माला-माल कर दिया। - गरीबी पर शायरी

रुखी रोटी बाँट कर( एडमिन द्वारा दिनाँक 07-05-2017 को प्रस्तुत )रुखी रोटी को भी बाँट कर खाते हुये देखा मैंने,सड़क किनारे वो भिखारी शहंशाह निकला। - गरीबी पर शायरी

गरीबी में रिश्ता( मंगेश मिश्रा द्वारा दिनाँक 10-05-2016 को प्रस्तुत )हजारों दोस्त बन जाते है, जब पैसा पास होता है,टूट जाता है गरीबी में, जो रिश्ता ख़ास होता है। - गरीबी पर शायरी

गरीबी बन गई तश्हीर का सबब आमिर,जिसे भी देखो हमारी मिसाल देता है। - गरीबी पर शायरी

जो मौत से न डरता था, बच्चों से डर गया,एक रात जब खाली हाथ मजदूर घर गया। गरीबी पर शायरी

जनाजा बहुत भारी था उस गरीब का,शायद सारे अरमान साथ लिए जा रहा था। - गरीबी पर शायरी

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