गुनाह करके – दो लाइन शायरी

गुनाह करके कहाँ जाओगे गालिब,
ये जमीन और आसमान सब उसी का है।

- दो लाइन शायरी

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तुम अपने ज़ुल्म की इन्तेहा कर दो,न जाने - फिर कोई हम सा बेजुबां मिले ना मिले । दो लाइन शायरी

वो सुना रहे थे अपनी वफाओ के किस्से,हम पर नज़र पड़ी तो खामोश हो गए । - दो लाइन शायरी

तलब की राह में पाने से पहले खोना पड़ता है,बड़े सौदे नज़र में हो तो छोटा होना पड़ता है। - दो लाइन शायरी

उंगलियाँ थक गईपत्थर तराशते-तराशते,जब सूरत बनी यार कीतो ख़रीदार आ गए । दो लाइन शायरी

कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग,दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते।--------------------------------------ना मैं शायर हूँ ना मेरा शायरी से कोई वास्ता,बस शौक बन गया है, तेरे जलवों को बयान करना।--------------------------------------मुस्कुरा देता हूँ अक्सर...

बस यही दो मसले, जिंदगी भर ना हल हुए,ना नींद पूरी हुई... ना ख्वाब मुकम्मल हुए। - दो लाइन शायरी

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