गुमनामी का अँधेरा – सैड शायरी

गुमनामी का अँधेरा कुछ इस तरह छा गया है,
कि दास्ताँ बन के जीना भी हमें रास आ गया है।

- सैड शायरी

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रास्ते तबाही के( एडमिन द्वारा दिनाँक 28-11-2016 को प्रस्तुत )रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हमने,कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने,हमें मालूम है क्या चीज़ है मोहब्बत यारो,घर अपना जला कर किये हैं...

ना जाने क्यूँ खुद को अधूरा सा पाया है,हर एक रिश्ते में खुद को गँवाया है । सैड शायरी

इसे इत्तेफाक समझोया दर्द भरी हकीकत,आँख जब भी नम हुई,वजह कोई अपना ही था।---------------------वक़्त बहुत कुछ, छीन लेता है...खैर मेरी तो सिर्फ़ मुस्कुराहट थी। - सैड शायरी

मुहब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे,मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चुका हूँ । - सैड शायरी

कहानी खत्म हो तो कुछ ऐसे खत्म हो...कि लोग रोने लगे..तालियाँ बजाते बजाते । - सैड शायरी

दिल टूटने की आवाज़( एडमिन द्वारा दिनाँक 14-01-2016 को प्रस्तुत )कितनी जल्दी थी उसको रूठ जाने की,आवाज़ तक न सुनी दिल के टूट जाने की। - सैड शायरी

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