घर जैसी रोटियाँ -माँ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

ना जाने माँ क्या मिलाया करती हैं आटे मे,ये घर जैसी रोटियाँ और कहीं मिलती नहीं।

माँ शायरी

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माँ की अजमत से अच्छा जाम क्या होगा,माँ की खिदमत से अच्छा काम क्या होगा,खुदा ने रख दी हो जिस के कदमों में जन्नत,सोचो उसके सर का मुकाम क्या होगा। - माँ शायरी

जन्नत के हर लम्हे का दीदार किया था,गोद में लेकर जब मॉ ने प्यार किया था। - माँ शायरी

जन्नत के हर लम्हे( एडमिन द्वारा दिनाँक 09-07-2018 को प्रस्तुत )जन्नत के हर लम्हे का दीदार किया था,गोद में लेकर जब मॉ ने प्यार किया था। - माँ शायरी

हँसकर मेरा हर गम भुलाती है माँ,मैं रोता हूँ तो सीने से लगाती है माँ,बहुत दर्द दिया है इस ज़माने ने मुझको,सबकुछ झेलकर जीना सिखाती है माँ। माँ शायरी

बस एक माँ की मोहब्ब्बत दिखाई देती है,जमीं पे एक ही औरत दिखाई देती है,ऐ बूढ़ी माँ तेरे चेहरे की झुर्रियों की कसम,हर एक लकीर में जन्नत दिखाई देती है। माँ शायरी

माँ पाली नहीं जाती( उमेन्द्र सिंह गंगवार द्वारा दिनाँक 10-06-2018 को प्रस्तुत )माँ की दुआ कभी खाली नहीं जाती,माँ की बात कभी टाली नहीं जाती,अपने सब बच्चे पाल लेती है बर्तन धोकर,और बच्चों से एक...

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