जरा सा तुम बदल जाते – शिक़वा शायरी

जरा सा तुम बदल जाते,
जरा सा हम बदल जाते,
तो मुमकिन था ये रिश्ते किसी साँचे में ढल जाते।

- शिक़वा शायरी

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