तबीयत ही मिली ऐसी – सैड शायरी

कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी,
चैन से जीने की सूरत नहीं हुई,
जिसको चाहा उसे अपना न सके,
जो मिला उससे मुहब्बत न हुई।

- सैड शायरी

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