तमाम उम्र किसी – सैड शायरी

कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी जैसे,
तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा।

- सैड शायरी

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हाथ मेरे भूल बैठे दस्तकें देने का फ़न,बंद मुझ पर जब से उस के घर का दरवाज़ा हुआ। - सैड शायरी

मैं उसके चेहरे को दिल से उतार देता हूँ,मैं कभी कभी तो खुद को भी मार देता हूँ। सैड शायरी

तमाम उम्र किसी( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-09-2016 को प्रस्तुत )कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी जैसे,तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा। - सैड शायरी

इश्क़ को या खुदा क्यों नजर लग गई,यूँ लगे मेरी हर दुआ बेअसर हो गई,हमने तिनके चुने आशियाँ के लिए,जाने कैसे आँधियों को खबर हो गई। सैड शायरी

इश्क़ एक धोखा( अरविन्द द्वारा दिनाँक 20-02-2019 को प्रस्तुत )लोग कहते हैं इश्क़ एक धोखा है,हमने सुना ही नहीं आज़मा के देखा है,पहले लूट लेते हैं प्यार में जान तक,फिर कहते हैं कौन हो आप?आपको...

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