तेरी ज़ुल्फ़ों की घटा -तारीफ़ शायरी

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  • October 31, 2021

तेरी ज़ुल्फ़ों की घटाओं का मुंतज़िर हुआ जाता हूँ,अब ये आलम है कि बारिश भी सूखी सी लगती है।

तारीफ़ शायरी

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हटा कर ज़ुल्फ़ चेहरे सेना छत पर शाम को आना,कहीं कोई ईद ही ना कर लेअभी रमज़ान बाकी है। - तारीफ़ शायरी

हम तो अल्फाज़ ही ढूढ़ते रह गए,और वो आँखों से गज़ल कह गए। - तारीफ़ शायरी

फ़क़त इस शौक़ में( रमन सिंह द्वारा दिनाँक 11-02-2015 को प्रस्तुत )फ़क़त इस शौक़ में पूछी हैं हज़ारों बातें..मैं तेरा हुस्न तेरे हुस्न-ए-बयाँ तक देखूँ ।~ अहमद नदीम कासिमी - तारीफ़ शायरी

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चेहरा तेरा चाँद( अमन कुमार त्रिपाठी द्वारा दिनाँक 05-02-2019 को प्रस्तुत )तेरे इशारों पर मैं नाचूं क्या जादू ये तुम्हारा है,जब से तुमको देखा है दिल बेकाबू हमारा है,जुल्फें तेरी बादल जैसी आँख में तेरे...

उतरा है मेरे दिल में कोई चाँद नगर से,अब खौफ ना कोई अंधेरों के सफ़र से,वो बात है तुझ में कोई तुझ सा नहीं है,कि काश कोई देखे तुझे मेरी नजर से। - तारीफ़ शायरी

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