तेरे इश्क़ का ग़म -ग़म शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

तुझको पा कर भी न कम हो सकी मेरी बेताबी,इतना आसान तेरे इश्क़ का ग़म था ही नहीं।

ग़म शायरी

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दुनिया भी मिली गम-ए-दुनिया भी मिली है,वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से। ग़म शायरी

वो सूरज की तरह आग उगलते रहे, हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे, वो बीते वक़्त थे, उन्हें आना न था, हम सारी रात करवट बदलते रहे। - ग़म शायरी

न हिज्र है, न वस्ल है, अब इसको क्या कहें,फूल शाख पर तो है मगर खिला नहीं रहा। ग़म शायरी

बदन में आग सी है चेहरा गुलाब जैसा है,कि ज़हर-ए-ग़म का नशा भी शराब जैसा है,इसे कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही,दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है। ग़म शायरी

मेरे ग़म ने होश उनके भी खो दिए...वो समझाते समझाते खुद ही रो दिए। - ग़म शायरी

ग़म-ए-दुनिया में ग़म-ए-यार भी शामिल कर लो,नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें,अब न वो मैं हूँ, न तू है, न वो माज़ी है फ़राज़,जैसे दो साए तमन्ना के सराबों में मिलें। ग़म शायरी

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