तेरे जाने के बाद – सैड शायरी

वक़्त तो दो ही कठिन गुजरे है सारी उम्र में,
इक तेरे आने के पहले इक तेरे जाने के बाद।

- सैड शायरी

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तुम सुनो या न सुनो, हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ,डूबते-डूबते एक बार पुकारेंगे तुम्हें। सैड शायरी

मोहब्बत में न अपना कोई ठिकाना रहा,सारी उम्र बस उनका आना-जाना रहा,हमने राज खुलने न दिए दिल के उनपर,खतों में हर्फ़ का लिखना मिटाना रहा। सैड शायरी

शायरी क़यामत के रोज़( एडमिन द्वारा दिनाँक 30-12-2015 को प्रस्तुत )क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगाउससे ज़िन्दगी का हिसाब,ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला,जाने दो... मोहब्बत की है इसने। - सैड शायरी

खुदा ने लिखा ही नहीं( एडमिन द्वारा दिनाँक 12-04-2016 को प्रस्तुत )खुदा ने लिखा ही नहीं तुझको मेरी किस्मत में शायद,वरना खोया तो बहुत कुछ था एक तुझे पाने के लिए। - सैड शायरी

न हाथ थाम सके और न पकड़ सके दामन,बहुत ही क़रीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोई। - सैड शायरी

आइने में अक्सर जो अक्स नज़र आता है,खुद से लड़ता हुआ एक शख़्स नज़र आता है,वो किसी बात पे खुद से खफा लगता है,नाकाम मोहब्बत का नक्श नजर आता है। - सैड शायरी

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