थोडी थोडी ही सही -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

थोडी थोडी ही सही मगर बाते तो किया करो - चुपचाप रहती हो तो खफा खफा सी लगती हो।

शिक़वा शायरी

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न चाहत न मोहब्बत( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-11-2015 को प्रस्तुत )न चाहत न मोहब्बत न इश्क़ और न वफ़ा,कुछ भी तो नहीं था उसके पास इक हुस्न के सिवा। - शिक़वा शायरी

नजरअंदाजी की वजह( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-06-2016 को प्रस्तुत )नज़र अंदाज़ करने की वज़ह क्या है बता भी दो,मैं वही हूँ जिसे तुम दुनिया से बेहतर बताती थी। - शिक़वा शायरी

बिछड़ गए हैं जो उनका साथ क्या मांगू,ज़रा सी उम्र बाकी है इस गम से निजात क्या मांगू,वो साथ होते तो होती ज़रूरतें भी हमें,अपने अकेले के लिए कायनात क्या मांगू ।। शिक़वा शायरी

जरा सा तुम बदल जाते( एडमिन द्वारा दिनाँक 02-11-2018 को प्रस्तुत )जरा सा तुम बदल जाते, जरा सा हम बदल जाते,तो मुमकिन था ये रिश्ते किसी साँचे में ढल जाते। - शिक़वा शायरी

चलो अब जाने भी दो क्या करोगे हमारी दास्ताँ सुनकर,ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयाँ हमसे होगा नहीं। शिक़वा शायरी

सारी दूनिया के रूठ( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-07-2015 को प्रस्तुत )सारी दूनिया के रूठ जाने सेमुझे कोई फर्क नहीं पड़ता,बस एक तेरा खामोश रहनाबहुत तकलीफ देता है । - शिक़वा शायरी

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