दर्द ही अपना हमदर्द -दर्द शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

दर्द में जीने की हमें आदत कुछ ऐसी पड़ी,कि अब दर्द ही अपना हमदर्द लगने लगा।

दर्द शायरी

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दर्द की दौलत( एडमिन द्वारा दिनाँक 26-11-2016 को प्रस्तुत )खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो,आइना देख लो अहबाब से पूछा न करो,शेर अच्छे भी कहो, सच भी कहो, कम भी कहो,दर्द की...

वफ़ा का रंग जो गहरा दिखाई देता है,लहू उसमे कुछ हमारा दिखाई देता है,हमारा ग़म से ताल्लुक बहुत पुराना है,हमारा दर्द से रिश्ता दिखाई देता है। - दर्द शायरी

उसने दर्द इतना दिया कि सहा न गया,उसकी आदत सी थी इसलिए रहा न गया,आज भी रोती हूँ उसे दूर देख के,लेकिन दर्द देने वाले से ये कहा न गया।~ आराधना मिश्रा दर्द शायरी

बहुत हो चुका इंतज़ार उनका,अब और ज़ख़्म सहे जाते नहीं,क्या बयान करें उनके सितम को,दर्द दिल के हैं कहे जाते नहीं। दर्द शायरी

हम ने कब माँगा है तुम सेअपनी वफ़ाओं का सिला, दर्द शायरी

भुला कर हमें क्या वो खुश रह पाएंगे,साथ में नही तो मेरे जाने के बाद मुस्कुरायेंगे,दुआ है खुदा से की उन्हें कभी दर्द न देना,हम तो सह गए पर वो टूट जायेंगे। दर्द शायरी

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