दिलों से खेलना -एटीट्यूड शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

दिलों से खेलना हमें भी आता है परजिस खेल मेंखिलौना टूट जाए, वो खेल हमें पसंदनही..!

एटीट्यूड शायरी

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बैठता वहीं हूँ, जहाँ अपनेपन का अहसास है मुझको,यूँ तो ज़िंदगी में कितने ही लोग आवाज देते हैं मुझको। एटीट्यूड शायरी

सूरज ढला तो कद से ऊँचे हो गए साये,कभी पैरों से रौंदी थी यहीं परछाइयां हमने। एटीट्यूड शायरी

जल जाते हैं मेरे अंदाज से मेरे दुशमन...क्यूंकि एक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदलीऔर न ही दोस्त बदले। - एटीट्यूड शायरी

अगर तेवर न दिखाओ( एडमिन द्वारा दिनाँक 28-01-2019 को प्रस्तुत )तेवर न दिखाओ तो लोग आँख दिखाने लग जाते हैं।-------------------------------------हम जैसे इतिहास रचते हैं तेरे जैसे पढ़ते हैं।-------------------------------------हम अपना इक्का तभी दिखाते हैं जब सामने...

अभी आँखों की शमाएं जल रही हैं प्यार जिंदा है,अभी मायूस मत होना अभी बीमार ज़िंदा है,हजारों जख्म खाकर भी मैं दुश्मन के मुक़ाबिल हूँ,खुदा का शुक्र अब तक दिल-ए-खुद्दार जिंदा है। - एटीट्यूड शायरी

गुजरे हुए लम्हों में सदियाँ तलाश करता हूँ,प्यास गहरी है कि नदियाँ तलाश करता हूँ,यहाँ सब लोग गिनाते है खूबियां अपनी,मैं अपने-आप में कमियाँ तलाश करता हूँ। - एटीट्यूड शायरी

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