दीये की तरह समझा – ग़म शायरी

तुमने भी हमें बस एक दीये की तरह समझा,
रात हुई तो जला दिया सुबह हुई तो बुझा दिया।

- ग़म शायरी

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किसे सुनाएँ अपने गम केचन्द पन्नो के किस्से...यहाँ तो हर शख्सभरी किताब लिए बैठा है l - ग़म शायरी

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