दूरियां तो मिटा दूँ -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

तुझसे दूरियां तो मिटा दूँ मैं - एक पल में मगर,कभी कदम नहीं चलते कभी रास्ते नहीं मिलते।

शिक़वा शायरी

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कभी तो अपना वजूदहम पर लुटा के देखक्यों दो कदम चलकर तेरायकीन ठहर जाता है । - शिक़वा शायरी

फासले बढ़े तो गलतफहमियां और भी बढ़ गयीं,फिर उसने वह भी सुना जो मैंने कहा ही नहीं । - शिक़वा शायरी

तुम मेरे लिए अब कोई इल्जाम न ढूँढो,चाहा था तुम्हें एक यही इल्जाम बहुत है। - शिक़वा शायरी

उनसे कह दो मुझे खमोश ही रहने दें 'वसीम',लब पे आएगी तो हर बात गिराँ गुज़रेगी। शिक़वा शायरी

क्यों अपने इस आशिक का, परवानों में नाम लेते हो,कह कर कि दिल दोगे... हमारी जान लेते हो,पता है नहीं रख सकते, हम अपनी धड़कनों पे काबू,फिर क्यों हमारी मोहब्बत का इम्तिहान लेते हो। -...

जाने दुनिया में ऐसा क्यों होता है,जो सबको खुशी दे वही क्यों रोता है,उम्र भर जो साथ न दे सके,वही ज़िन्दगी का पहला प्यार क्यों होता है? शिक़वा शायरी

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