देखा गम का साया -ग़म शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

जहाँ भी देखा गम का साया,तू ही तू मुझको याद आया,

ग़म शायरी

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चाहत तो हर किसी( अमित सिंह द्वारा दिनाँक 23-04-2016 को प्रस्तुत )चाहत तो हर किसी की पूरी नहीं होती,ग़मों के बिना जिन्दगी आशा नहीं होती,कुछ लोग तो बीच मे ही साथ छोड़ देते हैं,पर बिना...

एक ग़म से भी( एडमिन द्वारा दिनाँक 23-02-2019 को प्रस्तुत )ढूंढ़ लाया हूँ ख़ुशी की छाँव जिसके वास्ते,एक ग़म से भी उसे दो-चार करना है मुझे।~ ग़ुलाम हुसैन साजिद - ग़म शायरी

आँसू होते नहीं बहाने के लिए,ग़म होते हैं पी जाने के लिए,मत सोचना किसी को पाने के लिए,वरना जिंदगी कम पड़ जाएगी,उसको भुलाने के लिए। - ग़म शायरी

महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,तन्हाई में रोना एक राज बन गया,दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया। - ग़म शायरी

ये ग़म मेरा हमसफ़र( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-10-2019 को प्रस्तुत )सख्त राहों में अब आसान सफर लगता है,अब अनजान ये सारा ही शहर लगता है,कोई नहीं है मेरा ज़िन्दगी की राह में,मेरा ये ग़म ही...

ग़म-ए-आरज़ू तेरी राह में,शब्-ए-आरज़ू तेरी चाह में,जो उजड़ गया वो बसा नहीं,जो बिछड़ गया वो मिला नहीं। ग़म शायरी

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