धुआँ दिल से उठा – दर्द शायरी

बिजलियाँ टूट पड़ी... जब वो मुकाबिल से उठा,
मिल के पलटी थीं निगाहें कि धुआँ दिल से उठा।

- दर्द शायरी

Related Post

दर्द ही अपना हमदर्द( दीपक साहनी द्वारा दिनाँक 10-06-2017 को प्रस्तुत )दर्द में जीने की हमें आदत कुछ ऐसी पड़ी,कि अब दर्द ही अपना हमदर्द लगने लगा। - दर्द शायरी

बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नहीं जाता,जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नहीं जाता,वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में,जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता। दर्द शायरी

दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले,मैंने देखे हैं कई कई रंग बदलने वाले,तुमने चुप रहकर सितम और भी ढाया मुझ पर,तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसने वाले। दर्द शायरी

हम ने कब माँगा है तुम सेअपनी वफ़ाओं का सिला, दर्द शायरी

वफ़ा का रंग जो गहरा दिखाई देता है,लहू उसमे कुछ हमारा दिखाई देता है,हमारा ग़म से ताल्लुक बहुत पुराना है,हमारा दर्द से रिश्ता दिखाई देता है। दर्द शायरी

बयाँ करना मोहब्बत को( एडमिन द्वारा दिनाँक 05-07-2015 को प्रस्तुत )बयाँ करना मोहब्बत कोआसान ना हुआ था ।ये तो दर्द है कैसे कह दूँकि ये तुमने दिया है । - दर्द शायरी

leaf-right
leaf-right