न हाथ थाम सके – सैड शायरी

न हाथ थाम सके और न पकड़ सके दामन,
बहुत ही क़रीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोई।

- सैड शायरी

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इसे इत्तेफाक समझोया दर्द भरी हकीकत,आँख जब भी नम हुई,वजह कोई अपना ही था।---------------------वक़्त बहुत कुछ, छीन लेता है - खैर मेरी तो सिर्फ़ मुस्कुराहट थी। सैड शायरी

उसकी शख्सियत में वो अहसास तो है,अभी अपना नहीं है मगर खास तो है,उसकी बातों में अभी है लफ्ज़-ए-इन्कार,बहुत थोड़ी ही सही मगर मुझे आस तो है।~प्रिन्स वर्मा - सैड शायरी

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सिमट गयी मेरी ग़ज़ल( Admin द्वारा दिनाँक 22-09-2015 को प्रस्तुत )सिमट गयी मेरी ग़ज़ल भी चंद अल्फाजों में,जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नहीं । - सैड शायरी

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