बस यही दो मसले -दो लाइन शायरी

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  • October 31, 2021

बस यही दो मसले, जिंदगी भर ना हल हुए,ना नींद पूरी हुई - ना ख्वाब मुकम्मल हुए।

दो लाइन शायरी

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जहर में दवा( एडमिन द्वारा दिनाँक 11-12-2017 को प्रस्तुत )इस शहर के लोगों में वफ़ा ढूँढ रहे हो,तुम जहर की शीशी में दवा ढूँढ रहे हो। - दो लाइन शायरी

कभी तिनके, कभी पत्ते, कभी खुशबू उड़ा लाई,हमारे घर तो आँधी भी कभी तनहा नहीं आई। दो लाइन शायरी

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे,तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे। दो लाइन शायरी

हमने कब कहा कि कीमत समझो तुम हमारी,ग़र हमें बिकना ही होता तो आज यूँ तनहा न होते। दो लाइन शायरी

हम भी दरिया हैं( एडमिन द्वारा दिनाँक 25-03-2015 को प्रस्तुत )हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है,जिस तरफ़ भी चल पड़ेगे, रास्ता हो जाएगा।। - दो लाइन शायरी

तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी ।तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमें बदनाम कर गया ।। दो लाइन शायरी

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