बहाने कितने – शिक़वा शायरी

मुझसे मिलने को करता था बहाने कितने,
अब मेरे बिना गुजारेगा वो जमाने कितने।

- शिक़वा शायरी

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बिछड़ना कबूल है( एडमिन द्वारा दिनाँक 08-08-2017 को प्रस्तुत )दिल पे बोझ लेकर तू मुलाकात को न आ,मिलना है इस तरह तो बिछड़ना कबूल है। - शिक़वा शायरी

मुमकिन हो आपसे तो भुला दीजिये मुझे,पत्थर पे हूँ लकीर, मिटा दीजिये मुझे,हर रोज़ मुझसे ताज़ा शिकायत है आपको,मैं क्या हूँ, एक बार बता दीजिये मुझे। - शिक़वा शायरी

तुम बदले तो मजबूरियाँ थी - हम बदले तो बेवफ़ा हो गए - । शिक़वा शायरी

जाने दुनिया में ऐसा क्यों होता है,जो सबको खुशी दे वही क्यों रोता है,उम्र भर जो साथ न दे सके,वही ज़िन्दगी का पहला प्यार क्यों होता है? - शिक़वा शायरी

न मोहब्बत संभाली गई,न नफरतें पाली गईं,बङा अफसोस है उस जिंदगी का,जो तेरे पीछे खाली गई l - शिक़वा शायरी

गुज़रे दिनों की भूली हुई बात की तरह,आँखों में जागता है कोई रात की तरह,उससे उम्मीद थी की निभाएगा साथ वो,वो भी बदल गया मेरे हालात की तरह । शिक़वा शायरी

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