बहुत अजब होती हैं -सैड शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

बहुत अजब होती हैंयादें यह मोहब्बत की,रोये थे जिन पलों मेंयाद कर उन्हें हँसी आती है,और हँसे थे जिन पलों मेंअब याद कर उन्हें रोना आता है।

सैड शायरी

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कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी जैसे,तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा। - सैड शायरी

पढ़ने वालों की कमी हो गयी हैआज इस ज़माने में - नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आँसूपूरी किताब है..।। सैड शायरी

मुझसे नजरें तो मिलाओ कि हजारों चेहरे,मेरी आँखों में सुलगते हैं सवालों की तरह,जुस्तजू ने किसी मंजिल पे ठहरने न दिया,हम भटकते रहे आवारा ख्यालों की तरह। - सैड शायरी

चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानगी अपनी,वरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते। सैड शायरी

मैं किसे सुना रहा हूँ ये ग़ज़ल मोहब्बतों की,कहीं आग साजिशों की कहीं आँच नफरतों की,कोई बाग जल रहा है ये मगर मेरी दुआ है,मेरे फूल तक न पहुँचे ये हवा तज़ामतों की। सैड शायरी

मुद्दत से थी किसी से मिलने की आरज़ू,ख्वाहिश-ए-दीदार में सबकुछ लुटा दिया,किसी ने दी खबर कि आएंगे वो रात को,इतना किया उजाला कि घर तक जला दिया। - सैड शायरी

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