बिछड़ना कबूल है -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

दिल पे बोझ लेकर तू मुलाकात को न आ,मिलना है इस तरह तो बिछड़ना कबूल है।

शिक़वा शायरी

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इश्क़ में कोई किसी का दिल तोड़ जाता है,दोस्ती में कोई दोस्त का भरोसा तोड़ जाता है,ज़िंदगी जीना तो कोई उस गुलाब से सीखे,जो खुद टूटकर दो दिलों को जोड़ जाता है। - शिक़वा शायरी

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