बेरुखी की इन्तेहाँ -सैड शायरी

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  • October 31, 2021

देखी है बेरुखी की - आज हम ने इन्तेहाँ,हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए।

सैड शायरी

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चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानगी अपनी,वरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते। सैड शायरी

देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं,दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं,नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर,फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं। - सैड शायरी

पूछा था हाल उन्होंने मेरा बड़ी मुद्दतों के बाद...कुछ गिर गया है आँख में कह कर हम रो पड़े l - सैड शायरी

कुछ पल की मुहब्बत शायरी( एडमिन द्वारा दिनाँक 26-12-2015 को प्रस्तुत )क्यूँ सताते हो मुझेजहाँ में जीने की इजाजत दे दो,बड़ा ही जख्मी दिल है मेराबस कुछ पल की मुहब्बत दे दो। - सैड शायरी

हमने भी कभी चाहा था एक ऐसे शख्स को,जो था आइने से नाज़ुक मगर था संगदिल। सैड शायरी

मुझसे नजरें तो मिलाओ कि हजारों चेहरे,मेरी आँखों में सुलगते हैं सवालों की तरह,जुस्तजू ने किसी मंजिल पे ठहरने न दिया,हम भटकते रहे आवारा ख्यालों की तरह। सैड शायरी

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